Generations of Computer

By | May 17, 2018

Generations of Computer

कम्प्यूटर की पीढ़ी



कंप्यूटर की विभिन्न पीढ़ियों को विकसित करने का उद्देश्य सस्ता , छोटा , तेज तथा विश्वासी कंप्यूटर बनाना रहा

है | 





1. FIRST GENERATION of COMPUTERS (प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर :  1942 – 1955 ) :-




युनिभैक – 1  पहला व्यावसायिक कंप्यूटर था | इस मशीन का  विकास फ़ौज और वैज्ञानिक उपयोग के लिए 

किया  गया था |  इसमें निर्वात ट्यूब ( vaccum Tubes ) का प्रयोग किया गया था | ये आकर में बड़े और 

अधिक ऊष्मा उत्पन्न करने वाले थे | इसमें सारे निर्देश तथा सूचनाएं 0 तथा 1 के रूप में कम्प्यूटर में संग्रहित होते 

थे तथा इसमें मशीनी  भाषा का प्रयोग किया गया था | संग्रहण के लिए पंचकार्ड का उपयोग किया गया था | 

उदहारण  – ENIAC , UNIVAC तथा MARK-1 इसके उदहारण है | निर्वात ट्युब के उपयोग में कुछ कमियां 

भी थी | निर्वात ट्यूब गर्म होने में  समय लगता था तथा गर्म होने के बाद अत्यधिक ऊष्मा पैदा होती थी ,जिसे ठंढा 

रखने के लिए खर्चीली वातानुकूलित यन्त्र (Air – Conditioning – System ) का उपयोग करना पड़ता था , तथा 

अधिक मात्रा में  विधुत खर्च होती थी |  

 Generation Of Computer










2. Second Generation Of Computer ( दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर : 1955 – 1964  ) :-

 इस पीढ़ी के कंप्यूटर में निर्वात ट्यूब की जगह हलके छोटे ट्रांजिस्टर ( Transitor ) का प्रयोग किया गया | 

कंप्यूटर में आंकड़ों ( Data ) को निरूपित करने के लिए मैगनेटिक कोर का उपयोग किया गया | आंकड़ों को 

संगृहीत करने के लिए मैगनेटिक डिस्क तथा टेप का उपयोग किया गया | मैगनेटिक डिस्क पर आयरन 

ऑक्साइड की परत होती थी | इनकी गति और संग्रहण क्षमता भी तीव्र थी | इन दौरान व्यवसाय तथा उद्योग 

जगत में  प्रयोग प्रारम्भ हुआ तथा नए प्रोग्रामिंग भाषा का विकास किया गया | 




3. Third Generation of Computer ( तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर : – 1965 – 1974 ) : – 

इलेक्ट्रॉनिक्स में निरंतर तकनिकी विकास से कंप्यूटर के आकर में कमी तथा तीव्र गति से कार्य करने की क्षमता

का विकास हुआ | तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर ट्रांजिस्टर के जगह इंटीग्रेटेड सर्किट ( Integrated Circuit  : – I.C )

का प्रयोग शुरू हुआ जिसका विकास जे. एस. किल्वी ने किया | आरम्भ में L.S.I ( Large Scale Integration )

का प्रयोग किया गया जिसमे एक सिलिकॉन चिप पर बड़ी  मात्रा में I.C या ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया | 


RAM ( Random Access Memory ) के प्रयोग होने से मैगनेटिक टेप  वृद्धि  हुई | लोगों द्वारा प्रयुक्त कम्प्यूटर

में टाइम शेयरिंग का विकास हुआ जिसके द्वारा एक से अधिक यूजर एकसाथ कंप्यूटर के संसाधन का उपयोग

कर सकते थे | हार्डवेयर  सॉफ्टवेयर अलग – अलग मिलना प्रारम्भ हुआ ताकि यूजर अपने आवश्यकतानुसार

सॉफ्टवेयर ले सके |





4. Fourth Generation Of Computer ( चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर : 1975 up till now ):-


चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर में LSI IC के जगह VLSI ( Very Large Scale Integration ) तथा ULSI ( Ultra Large 

Scale Integration ) का आरम्भ हुआ जिसमे एक चिप में लगभग लाखों चीजों को संगृहीत किया जा सकता था | 

VLSI  तकनीक के उपयोग से माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग न केवल कंप्यूटर में बल्कि और भी बहुत सारे उत्पादों

में किया गया जैसे : – वाहनों , सिलाई मशीन ,  माइक्रोवेव ओवन , इलेक्ट्रॉनिक गेम इत्यादि में | रैम ( RAM ) 

की क्षमता में वृद्धि से  समय की बचत हुई और  तीव्र गति से  लगा | इस दौरान GUI (Graphical User

Interface) के विकास से कंप्यूटर का उपयोग करना और सरल हो गया |  MS – DOS M , MS – WINDOWS

तथा Apple Mac Operating System तथा C भाषा का विकास हुआ | 

 5. Fifth Generation Of Computer ( पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर – at present ) : 

पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर में VLSI  के स्थान पर ULSI ( Ultra Large Scale Integration ) का विकास हुआ और 

एक चिप द्वारा करोड़ों गणना करना संभव हो सका | संग्रहण ( Storage ) के लिए C.D ( Compact Disk ) का 

विकास हुआ | इंटरनेट , ई-मेल तथा वर्ल्ड वाइड वेब ( W.W.W ) का विकास हुआ | बहुत छोटे तथा तीव्र   

कंप्यूटर का विकास हुआ | प्रोगरामिंग की जटिलता काम हो गई | कृत्रिम ज्ञान क्षमता को विकसित करने की 

कोशिश की गई ताकि परिस्थिति अनुसार कंप्यूटर निर्णय ले सके |  
















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